Essay on aankhon dekhi durghatna ka varnan of about 300-400 words

Do it yourself
 
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मैं अपने मित्रों के साथ घूम रहा था। शाम के सात बज रहे थे। तभी हमने देखा हमारे पास वाली इमारत में  आग लग गई। चूंकि आग मेरे सामने लगी थी। अतः मैंने तुरंत कदम उठाया और दमकल केंद्र में फोन कर दिया। उनके आने में समय था। आग धीरे-धीरे फैल रही थी। मैंने आव देखा न ताव और अपने घर की रसोई से पानी का पाइप लगा दिया। चूंकि इमारत मेरे घर की रसोई की खिड़की के सामने थी। पास वाली इमारत मेरे घर से 10 फुट दूरी पर थी।   अतः पाइप से पानी डालना कठिन नहीं था। हम दोनों इमारतों के मध्यम से गली निकलती थी। मेरी इस हरकत पर लोग चिल्लाए परन्तु जब लोगों का ध्यान उस ओर गया तो लोग हरकत में आए और इमारत को समय रहते खाली करा लिया गया। आग बढ़ रही थी। पर जिस स्थान पर मैंने पानी डाला वहाँ पर आग का प्रभाव अधिक नहीं रहा और इस तरह से सबको बचाया जा सका।
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